Uttarkashi बेटी की तलाश में बेबस हुआ परिवार! | Dhara Bugyal | Babita Pandey | Uttarakhand News

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जी हां दोस्तो दयारा बुग्यला में लापता बबीता पांडे के परिवार ने सरकार से लेकर आज जन से लगाई गुहार और मां ने पूछा सवाल कि मेरी बेटी कब आएगी। एक माँ की आँखें पिछले कई दिनों से अपनी बेटी के लौटने की राह देख रही हैं, हर फोन कॉल पर उम्मीद जागती है, हर गुजरते दिन के साथ बेचैनी बढ़ती जाती है। दयारा बुग्याल ट्रेकिंग के दौरान लापता हुई बबीता पांडे का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। बेटी की तलाश में परिवार की उम्मीदें अब प्रशासन, मुख्यमंत्री और आम जनता के सहयोग पर टिकी हैं। बबीता की माँ ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भावुक अपील करते हुए अपनी बेटी को सुरक्षित खोजने में मदद की गुहार लगाई है। सवाल यह है कि आखिर बबीता कहां है और कब तक इस परिवार का इंतजार खत्म होगा? कैसे अपनी बेटी की तलाश में बेबस नजर आ रहा परिवार बताउंगा आपको पूरी खबर। दोस्तो उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल में लापता हुई रामनगर की बेटी बबीता पांडे की तलाश लगातार जारी है। दिन बीतते जा रहे हैं, सर्च ऑपरेशन का दायरा बढ़ता जा रहा है, लेकिन अब तक बबीता का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। पहाड़ों, जंगलों, खाइयों और ट्रैकिंग रूट्स पर रेस्क्यू टीमें लगातार खोजबीन कर रही हैं, लेकिन दूसरी ओर रामनगर में एक परिवार की बेचैनी हर गुजरते घंटे के साथ बढ़ती जा रही है। जी हां दोस्तो एक मां की ये गुहार है कि मेरी बेटी को को ढुंढ कर ले आओ आज इतने दिन हो गए। बेटा मां को ढाढस बंधा रहा है लेकिन मां का एक ही सवाल है कि कब आएगी वो।

दोस्तो बबीता पांडे के भाई और परिजन कुछ लोग बबीता पांडे की तलाश में खाक छान रहे हैं और वहीं से बबीता पांडे का भाई भी मदद मांग रहा है। सरकार प्रशासन और आम जन से दोस्तो अब ये गुमशुदगी एक बड़े रहस्य में बदलती जा रही है जहां एक तरफ प्रशासनिक लोग बबीता की खोज में चप्पा-चप्पा छान रहे हैं। वहीं परिवार की बैचैनी बीतते दिन के साथ बढती जा रही है दोस्तो 24 साल कि बबीता पांडे 29 मई को अपने दो साथियों के साथ दयारा बुग्याल ट्रैक पर गई थी। बताया जा रहा है कि 30 मई को ट्रैकिंग के दौरान वह अचानक लापता हो गई। इसके बाद प्रशासन ने तत्काल सर्च और रेस्क्यू अभियान शुरू किया। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, वन विभाग, ड्रोन और डॉग स्क्वॉड की मदद से लगातार तलाश की जा रही है। इसकी तस्वीर भी आती रही हैं लेकिन बबीता पांडे को लेकर को सुराग नहीं मिला, लेकिन इधर दोस्तो इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे दर्दनाक तस्वीर उस परिवार की है जो पिछले कई दिनों से सिर्फ एक खबर का इंतजार कर रहा है। बबीता के पिता गोपाल पांडे की आवाज में चिंता साफ सुनाई देती है। वह बताते हैं कि उनकी बेटी पढ़ाई में बेहद होनहार थी और एमबीए की पढ़ाई कर रही थी। अपने भविष्य को लेकर गंभीर रहने वाली बबीता पार्ट टाइम नौकरी भी करती थी। आज उसी बेटी का कोई पता नहीं है। दोस्तो पिता की आंखों में उम्मीद है, लेकिन आवाज में दर्द भी, उनका कहना है कि प्रशासन पूरी कोशिश कर रहा है, लेकिन एक पिता होने के नाते उनका हर पल बेचैनी में गुजर रहा है। वे बस इतना चाहते हैं कि उनकी बेटी सकुशल वापस लौट आए। उधर दोस्तो घर में बबीता की दादी लक्ष्मी पांडे भी लगातार अपनी पोती के लौटने की प्रार्थना कर रही हैं। दादी कहती हैं कि घर का खाना-पीना, दिन-रात का चैन सब कुछ छिन गया है। परिवार का हर सदस्य सिर्फ यही सोच रहा है कि आखिर उनकी बेटी कहां है और किस हाल में होगी। दोस्तो दादी की भावुक अपील किसी का भी दिल पिघला सकती है उनका कहना है कि उनकी पोती सिर्फ घूमने और ट्रैकिंग के लिए गई थी। किसी ने नहीं सोचा था कि यह सफर इतनी बड़ी चिंता में बदल जाएगा। अब पूरा परिवार बस उसकी सुरक्षित वापसी की राह देख रहा है। इधर दयारा बुग्याल में सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है। रेस्क्यू टीमें हर संभावित स्थान पर तलाश कर रही हैं। प्रशासन का कहना है कि किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है और अभियान पूरी गंभीरता के साथ चलाया जा रहा है, लेकिन इन सबके बीच एक सवाल अब भी हवा में तैर रहा है—आखिर बबीता पांडे कहां है?इस सवाल का जवाब सिर्फ उसका परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा उत्तराखंड जानना चाहता है। हर गुजरते दिन के साथ उम्मीद और चिंता दोनों बढ़ रही हैं। और रामनगर के उस घर में आज भी एक ही दुआ की जा रही है—बबीता सुरक्षित लौट आए, ताकि इस परिवार का इंतजार खत्म हो सके।