Uttarkashi रहस्यमयी झील क्या यहीं छिपा है राज? | Dhara Bugyal | Babita Pandey | Uttarakhand News

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क्या दयारा बुग्याल की रहस्यमयी झील में छिपा है बबीता पांडे की गुमशुदगी का राज? आखिर 6 दिन पहले ट्रैकिंग के दौरान लापता हुई बबीता कहां गायब हो गईं? क्या वह किसी हादसे का शिकार हुईं, या फिर इस पूरे मामले के पीछे कोई और कहानी छिपी है? इन तमाम सवालों के बीच अब सर्च ऑपरेशन का फोकस उस झील पर आ गया है, जो ट्रेक कैंप के पास स्थित है। पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और वन विभाग की टीमें लगातार तलाश में जुटी हैं, जबकि परिवार और स्थानीय लोग हर पल किसी अच्छे समाचार का इंतजार कर रहे हैं। आखिर क्यों इस झील को अब इस रहस्य की सबसे अहम कड़ी माना जा रहा है, देखिए हमारी यह खास रिपोर्ट। जी हां दोस्तो पहले दयारा बुग्याल बना एक बड़ा रहस्य और यहां मिली है एक झील जिस पर जा टिकी हैं सबकी नजरे। दोस्तो उत्तरकाशी के प्रसिद्ध दयारा बुग्याल ट्रैक पर लापता हुई बबीता पांडेय की तलाश लगातार जारी है। कई दिनों से चल रहे सर्च ऑपरेशन के बावजूद अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिलने के बाद जांच और रेस्क्यू टीमों का फोकस अब कैंप के पास स्थित एक रहस्यमयी झील पर केंद्रित हो गया है। दोस्तो बबीता पांडेय के लापता होने के बाद से एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस, वन विभाग और स्थानीय गाइड लगातार क्षेत्र में सर्च अभियान चला रहे हैं। ट्रैकिंग रूट, आसपास के जंगल, गहरी ढलानें, घास के मैदान और संभावित सभी स्थानों की कई बार तलाशी ली जा चुकी है। लेकिन अब तक बबीता का कोई पता नहीं चल सका है।

इसी बीच सर्च ऑपरेशन में अब एक नया मोड़ आया है। रेस्क्यू एजेंसियों ने कैंप के समीप स्थित झील को जांच के दायरे में लिया है। माना जा रहा है कि इस झील की तलहटी में कोई ऐसा सुराग मिल सकता है जो पूरे मामले की गुत्थी सुलझाने में मददगार साबित हो। दोस्तो खबरों की माने तो झील में गहन तलाशी के लिए 6 सदस्यीय विशेष डीप सर्च टीम को तैयार किया गया। यह टीम आधुनिक अंडरवाटर उपकरणों और विशेष खोज तकनीकों की मदद से झील की तलहटी का निरीक्षण करेगी। टीम के जल्द मौके पर पहुंचने की संभावना है। इसके अलावा अधिकारियों का कहना है कि अब तक उपलब्ध सभी तथ्यों और संभावनाओं के आधार पर खोज अभियान चलाया जा रहा है। किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और लगातार बदलते मौसम के बावजूद रेस्क्यू टीमें पूरी मुस्तैदी के साथ अभियान में जुटी हुई हैं। वहीं बबीता के परिजन भी लगातार प्रशासन से जल्द से जल्द सुराग मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं। जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, परिवार की चिंता बढ़ती जा रही है। पूरे क्षेत्र की नजर अब इस विशेष डीप सर्च ऑपरेशन पर टिकी हुई है। दोस्तो जैसा कि हम सभी जानते हैं हिमालय की वादियों में एक अजीब सी खूबसूरती है। यही खूबसूरती हर साल हजारों लोगों को उत्तराखंड के ट्रैकिंग रूट्स तक खींच लाती है। लेकिन कभी-कभी यही पहाड़ ऐसे सवाल छोड़ जाते हैं जिनका जवाब लंबे समय तक नहीं मिल पाता। इन दिनों उत्तराखंड के दो ट्रैकिंग रूट्स दो अलग-अलग गुमशुदगी की घटनाओं के कारण चर्चा में हैं। दोस्तो दोनों मामलों में कई समानताएं हैं। दोनों लोग ट्रैकिंग के लिए पहुंचे थे, दोनों अचानक लापता हो गए और कई दिनों की खोजबीन के बाद भी उनका कोई स्पष्ट सुराग नहीं मिल पाया।

पहला मामला बागेश्वर जिले के प्रसिद्ध पिंडारी ग्लेशियर ट्रैक का है। नोएडा निवासी विशेष चौहान प्रकृति और एडवेंचर के शौकीन थे। वह पिंडारी ग्लेशियर की यात्रा पर निकले थे। वापसी के दौरान उन्होंने अपने साथी पोर्टर से कहा कि वे कुछ देर आराम करना चाहते हैं। इसके बाद पोर्टर आगे बढ़ गया। जब काफी देर तक विशेष बेस कैंप नहीं पहुंचे तो चिंता बढ़ने लगी। धीरे-धीरे मामला गुमशुदगी में बदल गया। पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय रेस्क्यू टीमें मैदान में उतरीं। खतरनाक ढलानों, जंगलों और नदी किनारों तक तलाश की गई। दोस्तो तलाशी के दौरान विशेष का कैमरा तो मिला, लेकिन विशेष नहीं मिले। यही वह बिंदु था जहां यह घटना एक सामान्य गुमशुदगी से आगे बढ़कर एक रहस्य बन गई और दोस्तो दूसरी ओर उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल में भी कुछ ऐसा ही हुआ। यहां ट्रैकिंग के लिए पहुंची बबीता पांडे अचानक लापता हो गईं। बताया जाता है कि रात के समय वह अपने कैंप क्षेत्र से बाहर निकली थीं। इसके बाद उनका कोई पता नहीं चला। सुबह होते ही खोज अभियान शुरू किया गया। ट्रैकिंग रूट, घास के मैदान, जंगल, पहाड़ी ढलानें और आसपास के इलाके खंगाले गए। कई एजेंसियां लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। दोस्तो अब असल सवाल यह नहीं है कि ये दोनों लोग कहां गए। दोस्तो एक तरफ उत्तराखंड सरकार लगातार ट्रैकिंग पर्यटन को बढ़ावा दे रही है। लेकिन इसके साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था को और आधुनिक बनाने की जरूरत भी महसूस की जा रही है।क्योंकि पहाड़ केवल रोमांच नहीं हैं, वे जिम्मेदारी भी हैं। फिलहाल विशेष चौहान और बबीता पांडे की तलाश जारी है। उनके परिवार उम्मीद लगाए बैठे हैं। रेस्क्यू टीमें दिन-रात प्रयास कर रही हैं कि आखिर बबीता पांडेय के साथ उस रात क्या हुआ था? क्या रहस्यमयी झील इस गुमशुदगी के रहस्य से पर्दा उठा पाएगी, या फिर यह मामला और उलझ जाएगा? इन सवालों के जवाब अब आने वाले सर्च ऑपरेशन से मिलने की उम्मीद की जा रही है।