क्या दयारा बुग्याल से आखिरकार बबीता पांडे की तलाश में कोई बड़ा सुराग मिला है? क्या एक महीने बाद सर्च ऑपरेशन निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है? आखिर क्यों अब ITBP, सेना और खोजी कुत्तों की भी मदद ली जा रही है? क्या यह अब तक का सबसे बड़ा तलाशी अभियान है? और बबीता पांडे कहां है। Babita Pandey Missing In Uttarkashi दोस्तों, दयारा बुग्याल से लापता हुईं बबीता पांडे का मामला अब और भी गंभीर होता जा रहा है। करीब एक महीने बीत जाने के बाद भी उनका कोई पता नहीं चल सका है। इसी बीच सर्च ऑपरेशन को और तेज करते हुए प्रशासन ने ITBP, भारतीय सेना और डॉग स्क्वॉड की मदद ली है। इससे उम्मीदें भी बढ़ी हैं और सवाल भी कि आखिर ऐसा क्या सुराग मिला है, जिसके बाद खोज अभियान को नए सिरे से विस्तार दिया गया है? क्या बबीता पांडे की तलाश अब किसी अहम मोड़ पर पहुंच चुकी है? या फिर यह सिर्फ हर संभावित सुराग को खंगालने की कोशिश है? दोस्तो दयारा ट्रेक पर रहस्यमय ढंग से लापता हुई ग्राम चिल्किया नैनीताल निवासी बबीता पांडे की गुमशुदगी को एक महीना हो चुका है। लेकिन, लापता बबीता के बारे में अब तक कहीं कोई सुराग नहीं मिल पाया है। बबीता की तलाश को पुलिस सहित अन्य एजेंसियों ने दयारा क्षेत्र में कई दिनों तक गहन सर्च आपरेशन चलाया। सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले। बावजूद इसके पुलिस सहित अन्य एजेंसियों के हाथ खाली है। यहां आपको एक बार फिर याद दिला दूं कि बीते 29 मई को 24 वर्षीय एमबीए छात्रा बबीता पांडे अपने दो पुरुष मित्रों के साथ दयारा बुग्याल की ट्रेक पर रवाना हुई थी, जहां वह दयारा के पड़ाव गोई बेस कैंप से मध्य रात्रि को रहस्यमय ढंग से लापता हो गई।
दोस्तो उसके साथियों ने उसकी गुमशुदगी के संबंध में आपातकालीन 112 नंबर पर अगले दिन शाम करीब आठ बजे सूचना दी थी, जिसके बाद पुलिस, एसओजी, वन विभाग, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ आदि ने गहन सर्च आपरेशन चलाया। इस आपरेशन में आइटीबीपी, सेना की भी मदद ली गई, साथ ही खोजी कुत्ते भी उतारे गए।बाद में करीब 35 मिनट तक हेलीकाप्टर से भी क्षेत्र का हवाई सर्वे किया गया। पुलिस, वन विभाग की टीमों ने भालुओं के संभावित ठिकानों व काली गुफाओं में भी पड़ताल की। लेकिन बबीता का कहीं कुछ पता नहीं चल पाया। हालांकि पुलिस का कहना था कि उसकी अंतिम लोकेशन गोई से 200 मीटर नीचे मिली थी। इस दौरान गोई की करीब छह-सात फीट गहरी झील की भी दो बार पड़ताल की गई, जिसमें एक बार तो वाटर पंप लगाकर झील पूरी तरह से खाली की गई। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बबीता की तलाश को पुलिस की कुछ टीमें मैदानी क्षेत्रों ऋषिकेश, देहरादून व हरिद्वार को रवाना हुई हैं, जो अभी वापस नहीं लौटी हैं। इसके अलावा उसकी तलाश को नियमित अंतराल पर दयारा क्षेत्र में भी सर्च आपरेशन चलाया जा रहा है, साथ ही बबीता की गुमशुदगी से संबंधित कुछ पंफलेट भी जगह-जगह वितरित किए गए हैं। पुलिस को उम्मीद है कि इनसे लापता बबीता के संबंध में कुछ न कुछ जानकारी अवश्य मिलेगी। दोस्तो स्वजन ने रहस्यमय ढंग से लापता बबीता पांडे की गुमशुदगी की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। बबीता के भाई हर्षित पांडे ने बुधवार को इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म फेसबुक पर लिखा कि आज तक उसकी लापता बहन के बारे में कुछ भी पता नहीं चल पाया है।
हर्षित ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मदद की मांग करते हुए लापता बहन की तलाश को सीबीआई से जांच कराने की मांग की, तो देखा आपने। एक महीना बीत चुका है, लेकिन बबीता पांडे अब भी लापता हैं। पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, वन विभाग, आईटीबीपी, सेना, डॉग स्क्वॉड और यहां तक कि हेलीकॉप्टर से हवाई सर्वे भी किया गया, लेकिन अब तक कोई निर्णायक सुराग सामने नहीं आ सका है।इधर, परिवार का धैर्य भी अब जवाब देने लगा है। बबीता के परिजनों ने मामले की सीबीआई जांच की मांग करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से हस्तक्षेप की अपील की है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बबीता पांडे कहां हैं? क्या वह किसी हादसे का शिकार हुईं, या इस रहस्यमयी गुमशुदगी के पीछे कोई और कहानी छिपी है? इन सवालों के जवाब का इंतजार सिर्फ परिवार ही नहीं, पूरा उत्तराखंड कर रहा है।फिलहाल पुलिस का सर्च ऑपरेशन जारी है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस रहस्य से पर्दा उठेगा। लेकिन जब तक बबीता का पता नहीं चलता, तब तक यह मामला उत्तराखंड की सबसे रहस्यमयी गुमशुदगी की घटनाओं में से एक बना रहेगा।इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है? क्या इस केस की जांच किसी केंद्रीय एजेंसी, जैसे CBI, को सौंपी जानी चाहिए? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए।