जी हां दोस्तो दिल्ली के चर्चित अग्निकांड में आखिर केशव नेगी ही निशाने पर क्यों हैं? क्या एक बड़े हादसे की जिम्मेदारी तय करने के बजाय किसी एक व्यक्ति को बलि का बकरा बनाया जा रहा है? क्या केशव नेगी वास्तव में दोषी हैं या फिर सिस्टम की नाकामियों को छिपाने के लिए उन्हें फंसाया गया है? इन सवालों ने अब उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक सियासी और सामाजिक बहस छेड़ दी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर केशव नेगी बेकसूर हैं, तो उन्हें इंसाफ कब मिलेगा और असली जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी? पूरी खबर बताता हूं आपको। दोस्तो बड़ी हैरानी वाली खबर है और अपने उत्तराखंड के लिए बड़ी चिंता वाली, कैसे दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड में बड़ी ही आसानी से दिल्ली की सरकार ने एक उत्तराखंड के बेटे सिर जारी जिम्मेदारी मढ़ दी गजब है। कुछ सवाल जवाब मांगते हैं, दोस्तो दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड के बाद ऐसा ही एक सवाल उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक गूंज रहा है—आखिर शेफ केशव नेगी की भूमिका क्या थी और उनकी गिरफ्तारी किन आधारों पर की गई? दोस्तो केशव नेगी उत्तराखंड के उन हजारों युवाओं में से एक हैं, जो रोजगार की तलाश में अपने घर-गांव छोड़कर महानगरों का रुख करते हैं उनका पेशा खाना बनाना है। वह किसी भवन के मालिक नहीं थे, न ही निर्माण एजेंसी से जुड़े थे और न ही किसी सरकारी विभाग में तैनात थे। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिस भवन में आग लगी, उसकी वैधता, फायर सेफ्टी व्यवस्था, एनओसी, आपातकालीन निकास, अवैध निर्माण या नियमों के उल्लंघन की जिम्मेदारी किसकी थी?
दोस्तो क्या ये जिम्मेदारी एक रसोइये की थी कि वह यह जांच करे कि बिल्डिंग के पास फायर एनओसी है या नहीं? क्या उसे यह सुनिश्चित करना था कि भवन में सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है? या फिर यह जिम्मेदारी भवन मालिकों, प्रबंधन और संबंधित विभागों की थी? दोस्तो अगर किसी हादसे के पीछे व्यवस्थागत खामियां हैं, तो जांच का दायरा उन सभी लोगों तक पहुंचना चाहिए जो निर्णय लेने और नियम लागू कराने की स्थिति में थे। दोस्तो दिल्ली का स्थानीय प्रशासन और दिल्ली की सरकार अपना सिर बचाने के लिए ये सब कर रही है या फिर इसके पीछे कोई और वजह है। दोस्तो पूरा उत्तराखंड ये पूछ रहा है कि शेफ केशव नेगी की गिरफ्तारी क्यों? लेकिन दोस्तो जैसे की आपने वो खबर देखी होगी बड़ी ही हृदयविदारक घटना थी जब दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड में 21 निर्दोष लोगों की दर्दनाक जान चली गई। दोस्तो येएक ऐसी त्रासदी है जिसने पूरे देश को झकझोर दिया, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस हादसे की जिम्मेदारी आखिर किसकी है। दोस्तो कार्यवाही के नाम पर उत्तराखंड के शेफ केशव नेगी को गिरफ्तार कर लिया गया। एक ऐसा व्यक्ति, जो उत्तराखंड के पहाड़ों से पलायन कर अपने परिवार का भरण-पोषण करने दिल्ली आया था और जिसका काम केवल रसोई में खाना बनाना था। गिरफ्तारी के अलावा ये सवाल आज दिल्ली की सरकार और सिस्टम से पूरा देश पूछ रहा है क्या उसकी जिम्मेदारी थी यह जांचना कि बिल्डिंग वैध है या अवैध?
क्या उसे देखना था कि फायर NOC है या नहीं? क्या वह तय करता था कि भवन में एक ही एंट्री-एग्जिट क्यों है? क्या वह अवैध निर्माण, अतिक्रमण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के लिए जिम्मेदार था? दोस्तो अगर इतने बड़े स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई, तो जवाबदेही उन लोगों की भी तय होनी चाहिए जिन पर कानून लागू कराने, निरीक्षण करने और अनुमति देने की जिम्मेदारी थी। 21 लोगों की मौत जैसे गंभीर मामले में केवल सबसे कमजोर कड़ी को पकड़ लेना आसान है, लेकिन क्या जांच उन लोगों तक भी पहुंचेगी जिनकी लापरवाही ने इस त्रासदी को जन्म दिया? लेकिन दोस्तो किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जवाबदेही ऊपर से शुरू होती है, नीचे से नहीं। इसलिए यह जरूरी है कि जांच निष्पक्ष हो, तथ्यों और सबूतों पर आधारित हो तथा किसी भी व्यक्ति को केवल परिस्थितियों के आधार पर दोषी न ठहराया जाए। दोस्तो ये एक कारण है कि अब उत्तराखंड में भी यह मांग उठ रही है कि केशव नेगी को निष्पक्ष कानूनी सहायता मिले और मामले की हर परत की पारदर्शी जांच हो। उत्तराखंड सरकार, जनप्रतिनिधियों और सांसदों से भी अपेक्षा की जा रही है कि वे मामले की कानूनी स्थिति पर नजर रखें और यह सुनिश्चित करें कि किसी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय न हो। आखिरकार दोस्तो यह केवल केशव नेगी का मामला नहीं है। यह उस विश्वास का सवाल है कि कानून सबके लिए समान है, जिम्मेदारी वहीं तय होगी जहां वास्तव में बनती है, और किसी हादसे के बाद सबसे कमजोर कड़ी को पकड़कर न्याय का दिखावा नहीं किया जाएगा तो दोस्तों, आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 21 मौतों का सच सिर्फ एक गिरफ्तारी से सामने आ जाएगा? क्या एक शेफ को जेल भेज देने से उन परिवारों को इंसाफ मिल जाएगा जिन्होंने अपने अपनों को खो दिया? या फिर इस त्रासदी की परतें अभी और खुलनी बाकी हैं? क्योंकि अगर कहीं नियमों की अनदेखी हुई, अगर सुरक्षा मानकों को ताक पर रखा गया, अगर जिम्मेदार विभागों ने समय रहते अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई, तो फिर जांच का दायरा सिर्फ एक कर्मचारी तक सीमित नहीं रहना चाहिए। कानून का उद्देश्य सिर्फ आरोपी ढूंढना नहीं, बल्कि सच्चाई तक पहुंचना भी होता है। आज उत्तराखंड का हर व्यक्ति यही पूछ रहा है कि क्या केशव नेगी को निष्पक्ष सुनवाई और न्याय मिलेगा? क्या जांच उन सभी लोगों तक पहुंचेगी जो इस पूरे सिस्टम का हिस्सा थे? और क्या 21 बेगुनाह लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार हर शख्स की जवाबदेही तय होगी?हम किसी को दोषी या निर्दोष घोषित नहीं कर रहे। यह काम अदालत और जांच एजेंसियों का है। लेकिन सवाल पूछना जनता का अधिकार है और जवाब देना व्यवस्था की जिम्मेदारी। फिलहाल इस मामले पर आपकी क्या राय है? क्या केशव नेगी इस पूरे मामले के मुख्य जिम्मेदार हैं या फिर जांच को और व्यापक होना चाहिए?