क्यों बाबा ने लगाई हुड़दंगियों को फटकार | Hariyana | Bageshwar Baba | Badrinath | Uttarakhand News

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क्या देवभूमि उत्तराखंड की धार्मिक मर्यादाएं धीरे-धीरे खत्म होती जा रही हैं?क्या तीर्थ स्थलों पर श्रद्धा की जगह पिकनिक और मौज-मस्ती का चलन बढ़ रहा है?और आखिर क्यों उत्तराखंड-हरियाणा विवाद के बीच बागेश्वर बाबा को कहना पड़ा कि “तीर्थों में आया करो भक्त बनकर, पिकनिक के लिए नहीं”? देवभूमि में हो रही घटनाओं पर अब बागेश्वर बाबा की इस दो टूक टिप्पणी ने नई बहस छेड़ दी है। आखिर बाबा ने ऐसा क्यों कहा और इसके पीछे क्या है पूरा मामला, देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट। दोस्तो बीते कुछ वक्त से जैसा की आप सब देख रहे होंगे कि उत्तराखंड में तीर्थाटन के नामपर बवाल। पर्यटन के नाम पर हंगामा हुड़दंग देखने को मिल ही रहा है और इस पूरे मामले में ज्यादा तर लोग जो पकड़े गये या जिन पर कार्रवाई हुई या फिर जिनको लोगों ने पीटा वो ज्यादा तर लोग हरियाणा के निकलते रहे हैं, लेकिन बार-बार समझाइस के बाद भी कुछ लोग मानने को तैयार हैं ही नहीं ऐसे में एक तरह कि बहस का जन्म तब हुआ जब हरियाणा के कुछ युट्यूबर ने उत्तराखंड की देवभूमि होने पर ही सवाल कर दिये। ऐसे में दोस्तो एक बयान जो उत्तराखंड हरियाणा बहस के बीच आया बागेश्वर बाबा का बड़ा बयान बोले तीर्थों में आया करो भक्त बनकर पिकनिक के लिए नहीं। दोस्तो कुछ लोग हैं कि मानने को तैयार ही नहीं हैं, उनको कोई मतलब नहीं है बाबा इन सब बातों से आप चाहे कुछ कह लो, ये तीर्तों में आते हैं रील बनाने के लिए ये पयर्टक बनकर आते हैं सिर्फ नशा कर बवाल काटने के लिए इससे ज्यादा बाबा इनको देवभूमि के बारे में कुछ भी नहीं मालूम दोस्तो देवभूमि उत्तराखंड इन दिनों केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और चारधाम यात्रा को लेकर ही चर्चा में नहीं है, बल्कि तीर्थ स्थलों की मर्यादा और वहां आने वाले पर्यटकों के व्यवहार को लेकर भी बहस तेज हो गई है। इसी बीच प्रसिद्ध कथावाचक बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, जिन्हें लोग बागेश्वर बाबा के नाम से जानते हैं, का एक बयान चर्चा का विषय बन गया है। बागेश्वर बाबा ने कहा है कि तीर्थ स्थलों पर लोगों को भक्त बनकर आना चाहिए, पिकनिक मनाने के उद्देश्य से नहीं। उनका कहना है कि तीर्थ केवल घूमने-फिरने की जगह नहीं हैं, बल्कि आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक साधना के केंद्र हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को उस स्थान की गरिमा और धार्मिक परंपराओं का सम्मान करना चाहिए जरा सुनिए और उन लोगों को भी सुनाने का काम करना जो उत्तराखंड में आकर तीर्थाटन के नाम पर पर्यटन के नाम पर सिर्फ गंद मचाने के लिए आते हैं और फिर पीछे से उनके पैरो कार सोसल मीडिया के माध्य से उत्तराखंड़ को गलिया देते हैं, देवभूमि के देवभूमि होने पर ही सवाल करते हैं।

दरअसल, दोस्तो पिछले कुछ समय से उत्तराखंड के विभिन्न धार्मिक और पर्यटन स्थलों से ऐसे वीडियो और घटनाएं सामने आई हैं, जिन पर लोगों ने आपत्ति जताई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ वीडियो ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या तीर्थ स्थलों की मर्यादा का पर्याप्त सम्मान किया जा रहा है। इसी पृष्ठभूमि में बागेश्वर बाबा का यह बयान सामने आया है, लेकिन एक तरफ मै बाबा बागेश्वर धाम का ये बयान देख रहा था तब तक मेरे सामने एक और तस्वीर आ गई। अब वो तस्वीर क्या थी वो मै आपको पहले दिखाता हूं फिर आगे बात करुंगा। दोस्तो देवभूमि ऋषिकेश से एक और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, वायरल वीडियो में हरियाणा नंबर की एक गाड़ी दिखाई दे रही है, जिसमें सवार कुछ युवक कथित रूप से विवाद और मारपीट करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में गाड़ी के भीतर शराब की बोतलें भी दिखाई देने का दावा किया जा रहा है, जिसके बाद लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है स्थानीय लोगों का कहना है कि ऋषिकेश और अन्य धार्मिक स्थलों पर इस तरह की घटनाएं लगातार चर्चा का विषय बन रही हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद कई लोग तीर्थ नगरी की गरिमा और मर्यादा को लेकर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, दोस्तो वीडियो की सत्यता और पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि संबंधित प्रशासन या पुलिस की ओर से अभी नहीं की गई है। लेकिन वीडियो के सामने आने के बाद लोगों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी तरह की कानून व्यवस्था का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए लेकिन दोस्तो ये लोग कैसे मानेंगे और क्या करके मानेंगे। इधर पुलिस प्रशासन और यहां तक की बाबा साधु संत ऐसे लोगों से अपील तमाम कर रहे हैं लेकिन इनका ये हुड़दंग रुकने का नाम नहीं ले रहा है। दोस्तो देवभूमि केवल पर्यटन का केंद्र नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है। यहां आने वाले हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखने में अपना योगदान दे। जब लोग तीर्थ यात्रा पर निकलते हैं तो उनका उद्देश्य आध्यात्मिक शांति, दर्शन और साधना होना चाहिए, न कि केवल मनोरंजन। बागेश्वर बाबा के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है। एक वर्ग उनके विचारों का समर्थन कर रहा है और मानता है कि धार्मिक स्थलों की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। वहीं कुछ लोग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पर्यटन के दृष्टिकोण से भी देख रहे हैं। लेकिन दोस्तो ऐसी तस्वीरों का समर्थन तो नहीं किया जा सकता आजादी के नाम पर हालांकि, इस पूरे विवाद के बीच एक बात स्पष्ट है कि उत्तराखंड जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले प्रदेश में तीर्थ स्थलों की मर्यादा, स्वच्छता और धार्मिक वातावरण को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती भी है और सामूहिक जिम्मेदारी भी अब देखना होगा कि बागेश्वर बाबा के इस संदेश का समाज और तीर्थ यात्रियों पर कितना प्रभाव पड़ता है, लेकिन उनका यह बयान निश्चित रूप से देवभूमि और तीर्थ संस्कृति को लेकर चल रही बहस को नई दिशा देने का काम कर रहा है।