Ankita Bhandari ‘VIP’ का सच कब आएगा सामने?| India Gate | Protest | Uttarakhand News

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दोस्तो, उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग एक बार फिर सियासत के केंद्र में है! दिल्ली के इंडिया गेट से लेकर देहरादून के गांधी पार्क तक सवाल उठ रहे हैं। दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने पर अंकिता के परिवार की चिंताओं और कांग्रेस के विरोध ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। आखिर जिस कथित VIP की भूमिका की जांच की मांग लंबे समय से उठ रही है, उस मुद्दे पर अब तक क्या सामने आया है? राहुल गांधी भी इस मामले को लेकर सवाल उठा चुके हैं। वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने देहरादून में मौन उपवास रखकर नियुक्ति का विरोध किया। लेकिन सबसे बड़ा सवाल—अंकिता के परिवार को न्याय कब मिलेगा और जांच में कथित VIP की भूमिका पर स्थिति कब स्पष्ट होगी? दोस्तो न्याय की उम्मीद जब दम तोड़ने लगती है, तो बूढ़े और बेबस माता-पिता को देश की राजधानी की सड़कों पर उतरना पड़ता है। उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी, जिसकी चीखें आज भी पहाड़ की वादियों में गूंज रही हैं, उसके माता-पिता आज दिल्ली के इंडिया गेट पर धरने पर बैठ गए हैं! उनके साथ सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना भी मौजूद हैं।

दोस्तो विवाद इतना गहरा है कि पुलिस ने उन्हें हटाने की कोशिश की, पोस्टर तक छीन लिए, लेकिन टूटे हुए दिल और आंसुओं से भीगी आंखों में जो हौसला था, उसने सिस्टम को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। इनकी नाराजगी है दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने को लेकर। अंकिता के माता-पिता ने जिस नाम को ‘वीआईपी’ के तौर पर मुकदमे की जांच के दायरे में लाने की मांग की थी, उसे सरकार ने सीधे राजभवन का सेफ पैसेज दे दिया! कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस दुखद घड़ी में पीड़ित परिवार से मुलाकात की है और सीधे प्रधानमंत्री पर हमला बोला है। क्या वाकई उत्तराखंड की अस्मिता और जनमानस की भावनाओं का अपमान हुआ है? दोस्तो यह देश की वो राजधानी है जहां बड़ी-बड़ी गाड़ियों में वीआईपी घूमते हैं, लेकिन आज इसी दिल्ली के इंडिया गेट की सड़क पर उत्तराखंड की एक अभागी मां और एक लाचार पिता इंसाफ की भीख मांग रहे हैं। अंकिता भंडारी के माता-पिता और सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना जैसे ही धरने पर बैठे, पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। पुलिस ने उन्हें समझाने की कोशिश की, वहां से हटने को कहा। जब वो नहीं हटे, तो कहा गया कि आप यहां पोस्टर लेकर नहीं बैठ सकते। लेकिन सिस्टम की इस बेरुखी के आगे माता-पिता डिगे नहीं; उन्होंने अपने पोस्टर पुलिस के हवाले कर दिए, मगर अपनी जिद और दर्द के साथ वहीं डटे रहे।

दोस्तो आखिर इस बूढ़े बाप और रोती हुई मां का गुस्सा क्यों फूटा है? वजह है केंद्र सरकार का वो फैसला, जिसके तहत पूर्व भाजपा राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त कर दिया गया है। अंकिता के परिजनों का आरोप है कि उन्होंने जिस व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जाँच की माँग की थी, जिसे वे इस पूरे कांड का मुख्य ‘वीआईपी’ मान रहे हैं, उसे सजा मिलने के बजाय देश का एक बेहद सम्मानित संवैधानिक पद सौंप दिया गया! दोस्तो उत्तराखंड के जनमानस में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि यह निर्णय देवभूमि की भावनाओं का घोर अपमान है। विपक्ष का आरोप है कि प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार ने इस विवादित चेहरे को ‘सेफ पैसेज’ देकर राजभवन भेज दिया है और यह सीधे-सीधे उत्तराखंड के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है। दोस्तो इस मामले को लेकर उत्तराखंड में कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गणेश गोदियाल देहरादून के गांधी पार्क में गांधी प्रतिमा के समक्ष एक घंटे के सांकेतिक मौन उपवास पर बैठ गए। गोदियाल ने साफ कर दिया है कि अंकिता को न्याय दिलाने के लिए यह सिर्फ एक शुरुआत है, और आने वाले दिनों में वरिष्ठ नेताओं से चर्चा कर इस आंदोलन को पूरे देश में व्यापक रूप दिया जाएगा। दोस्तो दिल्ली के इस सियासी पारे के बीच, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी अंकिता भंडारी के माता-पिता से मुलाकात कर इस मामले में सीधी एंट्री ले ली है। राहुल गांधी ने पीड़ित परिवार को गले लगाया, उनका दर्द सुना और सीधे बीजेपी सरकार को आड़े हाथों लिया। राहुल गांधी ने साफ शब्दों में कहा कि अंकिता को हर हाल में न्याय मिलेगा और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए। आज पूरा पहाड़, उत्तराखंड की हर एक बेटी सिस्टम से आंखें मिलाकर एक ही तीखा सवाल पूछ रही है— ‘मेरे हिस्से का न्याय कहाँ है?’ दोस्तो कड़ाके की धूप और पुलिस के पहरे के बीच इंडिया गेट पर बैठा यह परिवार सिर्फ अपनी बेटी के लिए इंसाफ मांग रहा है। राज्यपाल की इस नियुक्ति ने उत्तराखंड के आगामी विधानसभा चुनावों से पहले एक ऐसा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है, जिसे संभालना बीजेपी के लिए बेहद मुश्किल होने वाला है। दोस्तो जब एक बेटी की जान चली जाती है और सालों बाद भी परिवार को सिर्फ आश्वासन मिलते हैं, तो राजनीति के मायने बदल जाते हैं। दुष्यंत गौतम की इस नियुक्ति ने कांग्रेस को सरकार को घेरने का एक बड़ा हथियार दे दिया है, और राहुल गांधी की इस मुलाकात ने साफ कर दिया है कि यह लड़ाई अब सिर्फ उत्तराखंड की नहीं, बल्कि देशव्यापी बनने जा रही है। देखना होगा कि इंडिया गेट से उठी यह चीख देश के नीति-नियंताओं के कानों तक कब पहुंचती है।