Uttarkashi Dayara Bugyal जश्न के बीच Babita Pandey का रहस्य! | Butter Festival | Uttarakhand News

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एक ही धरती, एक ही पहाड़, लेकिन दो बिल्कुल अलग तस्वीरें! एक तरफ समुद्र तल से 11 हजार फीट की ऊंचाई पर मखमली घास के मैदानों में दूध, दही और मक्खन की होली खेली जा रही है, अढूंड़ी उत्सव का जश्न मनाया जा रही है, लेकिन रुकिए, क्या आप जानते हैं कि उत्तरकाशी का यह खूबसूरत दयारा बुग्याल आज एक और खौफनाक वजह से पूरे देश में चर्चा का केंद्र बना हुआ है? जी हां! यह वही दयारा बुग्याल ट्रैक है, जहां से आज से ठीक कुछ महीने पहले, 24 साल की MBA छात्रा बबीता पांडे रहस्यमयी तरीके से टेंट से गायब हो गई थी, जिसका आज 80 दिन बाद भी कोई सुराग नहीं मिला है! आज जब इस बुग्याल में हजारों लोग जश्न मना रहे हैं, तब वहां की हवाओं में बबीता पांडे की गुमशुदगी का एक गहरा सस्पेंस भी तैर रहा है। आखिर जश्न और खौफ के इस अजीबो-गरीब संगम के पीछे की पूरी कहानी क्या है? बताउंग आपको पूरी खबर। दोस्तो उत्तरकाशी जिले का विश्व प्रसिद्ध दयारा बुग्याल जहां इन दिनों आस्था, संस्कृति और प्रकृति का एक अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। समुद्र तल से 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित इन मखमली घास के मैदानों में ‘बटर फेस्टिवल’ यानी अढूंड़ी उत्सव बेहद धूमधाम से मनाया जा रहा है। भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं से प्रेरित इस त्योहार में ग्रामीण एक-दूसरे को रंग-गुलाल नहीं, बल्कि शुद्ध दूध, दही और मक्खन लगाकर होली खेलते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, जब मवेशी गर्मियों में बुग्याल से सुरक्षित घर लौटते हैं, तो प्रकृति और लोक देवताओं का आभार जताने के लिए यह उत्सव सदियों से मनाया जा रहा है। “लेकिन इस मखमली घास और जश्न के पीछे एक ऐसा खौफनाक सच भी छिपा है, जो इस उत्सव के बीच हर किसी के जेहन में कौंध रहा है। यह खूबसूरत बुग्याल वही जगह है, जहां बीती 29 मई की रात को नैनीताल के रामनगर की रहने वाली 24 वर्षीय ट्रैकर बबीता पांडे अपने टेंट से अचानक गायब हो गई थी। आज करीब 80 दिन बीत चुके हैं, लेकिन बबीता का कोई सुराग नहीं मिला है। जिस गोई बेस कैंप के रास्ते से होकर आज हजारों पर्यटक इस बटर फेस्टिवल को देखने जा रहे हैं, उसी रास्ते के घने जंगलों और भालू की गुफाओं में SDRF, NDRF और पुलिस के जवान महीनों से बबीता की लाश या उसका कोई सुराग ढूंढ रहे हैं।

दोस्तो स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए दयारा बुग्याल आज भले ही दूध और मक्खन की होली से महक रहा हो, लेकिन बबीता के भाई हर्षित पांडे और उसके माता-पिता के लिए यह बुग्याल किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है। पुलिस की जांच में ये बात सामने आई थी कि गायब होने वाली रात को बबीता ने इसी बुग्याल के कैंप में पार्टी की थी और आखिरी बार उसे रात 11:30 बजे अकेले फोन चलाते देखा गया था। आज इस मेले के शोर में बबीता के परिवार की वो चीखें कहीं दब सी गई हैं, जो पिछले 80 दिनों से सिर्फ एक ही सवाल पूछ रही हैं—कि आखिर उनकी बेटी को ये पहाड़ खा गए या कोई आसमान निगल गया? दोस्तो हैरानी की बात यह है कि इस बुग्याल और अढूंड़ी उत्सव से जुड़ी कई स्थानीय मान्यताएं भी हैं। ग्रामीण इलाकों में अंधविश्वास है कि बबीता को मखमली घास के मैदानों से ‘परियां’ उठा ले गई हैं। लेकिन उत्तरकाशी पुलिस इस थ्योरी को नकार चुकी है। पुलिस ने बबीता के साथ गए दोनों दोस्तों के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज किया है और अब ऋषिकेश एम्स व दून अस्पताल के अज्ञात शवों के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। आज इस बटर फेस्टिवल में आने वाले हर ट्रैकर की सुरक्षा को लेकर भी कड़े इंतजाम किए गए हैं, ताकि बबीता जैसा कोई दूसरा हादसा दोबारा इस पवित्र और खूबसूरत बुग्याल को दागदार न कर सके। दोस्तो प्रकृति का सौंदर्य और इंसान की बेबसी का ऐसा संगम शायद ही कहीं देखने को मिले। एक तरफ जहां पूरा उत्तरकाशी इस अनोखे ‘बटर फेस्टिवल’ के रंग में रंगा है, वहीं देवभूमि की इस बेटी बबीता पांडे की सुरक्षित वापसी या न्याय के लिए भी दुआएं मांगी जा रही हैं। हमें उत्सव भी मनाना है, लेकिन अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर तंत्र पर सवाल भी खड़े करने हैं। इस पूरी रिपोर्ट पर और बबीता पांडे के इस केस पर आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में ज़रूर बताएं। इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। हमारे चैनल को फॉलो और सब्सक्राइब करना न भूलें।