Pantnagar Sidcul श्रमिक आंदोलन से हड़कंप! | Udham Singh Nagar | Labour Protest | Uttarakhand News

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उत्तराखंड का पंतनगर आज एक बड़े श्रमिक आंदोलन का गवाह बन गया है, आखिर वो कौन सी वजह रही, जिसने हजारों मजदूरों को सड़क पर उतरने पर मजबूर कर दिया? क्या यह सिर्फ एक औद्योगिक विवाद है या इसके पीछे लंबे समय से चल रही अनदेखी और नाराजगी है। कैसे नोएडा जैसे बड़े श्रमिक बवाल की तर्ज पर अब उत्तराखंड में भी हालात बिगड़ते नजर आ रहे है और पंतनगर की फैक्ट्रियों के बाहर मजदूरों का गुस्सा लगातार क्यों बढ रहा है बताउंगा आपको पूरी खबर अपनी इस रिपो्रट में। दोस्तो क्यों मजदूरों ने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है? दोस्तो ऐसी तस्वीरें कुछ नोएडा में देखने को मिला था, जहां श्रमिक आंदोलन ने आग लगा दी और शासन प्रशान के साथ पुलिसिया परेशानी को बढा दिया। दोस्तो ऐसा ही आंदोलन की गूंज अब उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले तक पहुंच गई है। पंतनगर सिडकुल क्षेत्र की कई बड़ी कंपनियों में श्रमिक धरने पर बैठ गए हैं। वेतन वृद्धि सहित कई मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। दोस्तो बताया जा रहा है कि ए जाकी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, बडवे, अनसूया ऑटो प्रेस और बेला राइस जैसी कंपनियों में काम करने वाले श्रमिक बड़ी संख्या में कंपनी परिसरों के बाहर एकत्र हुए। सभी ने जोरदार नारेबाजी की. प्रदर्शनकारियों ने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ विरोध जताते हुए नारे लगाए। सभी ने अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की अपील की।

दोस्तो श्रमिकों की प्रमुख मांगों में वेतन वृद्धि सबसे अहम है। उनका कहना है कि वर्तमान में उन्हें लगभग 11,500 रुपये मासिक वेतन दिया जा रहा है, जो कि आज के महंगाई भरे दौर में बेहद कम है। उन्होंने मांग की है कि उनका न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 21,000 रुपये किया जाए। इसके अलावा श्रमिकों ने आने-जाने के लिए उचित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की भी मांग रखी है। दोस्तो श्रमिकों के अनुसार, ए जाकी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में करीब 16,000 श्रमिक तीनों शिफ्टों में कार्यरत हैं। अनसूया ऑटो प्रेस में लगभग 1,000 मजदूर काम करते हैं। इसी तरह अन्य कंपनियों में भी बड़ी संख्या में श्रमिक कार्यरत हैं। दोस्तो ऐसे में जब इन कंपनियों के कर्मचारी एक साथ धरने पर बैठते हैं, तो इसका असर पूरे औद्योगिक क्षेत्र पर पड़ना तय माना जा रहा है स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन और पुलिस तुरंत हरकत में आ गए. कई थानों की पुलिस, पीएसी और खुफिया विभाग के अधिकारी मौके पर तैनात किए गए हैं जिससे किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। प्रशासन का प्रयास है कि हालात नियंत्रण में बने रहें बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाए। दोस्तो सूचना मिलते ही श्रम विभाग भी सक्रिय हो गया। अरविंद सैनी, श्रम निरीक्षक मौके पर पहुंचे। उन्होंने कंपनी प्रबंधन तथा श्रमिकों के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता शुरू की। उन्होंने बताया फिलहाल बातचीत जारी है। इसके बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी जिस तरह से नोएडा में श्रमिक आंदोलन ने उग्र रूप लिया था, उसी को देखते हुए प्रशासन यहां अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है। श्रमिकों की मांगों पर जल्द ठोस निर्णय लेने को कहा है तो दोस्तों, पंतनगर सिडकुल में शुरू हुआ यह श्रमिक आंदोलन आखिर किस मोड़ पर जाकर थमेगा? क्या कंपनी प्रबंधन और मजदूरों के बीच चल रही बातचीत कोई ठोस समाधान निकाल पाएगी?सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 11,500 रुपये की मौजूदा तनख्वाह और 21,000 रुपये की मांग के बीच की यह खाई जल्द पाटी जा सकेगी, या फिर हालात और ज्यादा बिगड़ सकते हैं?नोएडा जैसे श्रमिक बवाल की तर्ज पर क्या उत्तराखंड का यह औद्योगिक क्षेत्र भी लंबे टकराव की ओर बढ़ रहा है? और क्या प्रशासन की मौजूदगी हालात को स्थिर रख पाएगी?फिलहाल सबकी नजरें वार्ता के नतीजों पर टिकी है क्योंकि यही तय करेगा कि पंतनगर में हालात शांत होंगे या आंदोलन और तेज होगा।