Dehradun पुल धंसाव के बाद सियासी ड्रामा!| Nandachowki | Congress | BJP CM Dhami | Uttarakhand News

Spread the love

दोस्तों, देहरादून में एक पुल के धंसाव ने अब सिर्फ इंजीनियरिंग नहीं, बल्कि सियासत की भी परीक्षा शुरू कर दी है। जिस पुल पर करोड़ों रुपये खर्च हुए, उसी के पास हुए धंसाव के बाद अब आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस नेताओं ने हाथ में दूरबीन लेकर बीजेपी के “विकास” को तलाशना शुरू कर दिया। आखिर दूरबीन लेकर पुल पर क्यों पहुंचे कांग्रेसी नेता? क्या सिर्फ विरोध था या सरकार पर बड़ा राजनीतिक तंज? दोस्तो सियासत अपनी जगह पर लेकिन विकास और विनाश कितना फर्क होता है वो एक छोटी सी छूक किसी योजना में घपला और किसी पुल के निर्माण में बरती गई लापरवाही हो सकता है। खैर देहूरादून में दो महीने पहले बने करोंड़ो के पुल पर सियासत इतरा रही थी, यानि की मंत्री, बीजेपी, उसी पुल में निर्माण के बाद हुई पहली बड़ी बारिश ने बहुत बड़ा गड्ढा कर दिया। अब उस गड्ढे को भरने में लगी है बल अपनी सियासत। दोस्तो ये दो तस्वीर फर्क ये है कि एक तस्वीर आज से दो महीने पहले की है जब प्रदेश के PWD मंत्री सतपाल महाराज कैटवॉक करते हुए रील बनवाई थी, गुणवत्ता और निर्माण कार्य की तारीफ़ भी की थी और दूसरी तस्वीर उस तारीफ की हकिकत की है यानि नई और ताजा तस्वीर।

दोस्तो जब सिस्टम सरकार के दावों पर ये बड़ा सा गड्ढा हो गया, तो पूरा प्रशासनिक अमला पहुंचा, सीएम धामी ने भी बयान दिया, लेकिन महाराज जी ना पहुंचे और ना ही कोई बयान दिया। खैर ये बात थोड़ी अलग हो सकती है, लेकिन यहां कांग्रेस ने विपक्ष ने इस तस्वीर को हाथों हाथ लिया। विकास पर भ्रष्टाचार का नया छेद बता दिया। मै कांग्रेस के आक्रोस को दिखाऊ उससे पहले आप जरा इस तस्वीर को देखिए कैसे कांग्रेस के एक नेता ने आपदा में अवसर दूरबीन के जरिए तलासने की कोशिश की और सरकार सिस्टम को आइना दिखाने का काम किया। दोस्तो देहरादून में पुल की एप्रोच रोड ढह जाने के बादग्रेस नेता आर्येंद्र शर्मा पहुंचे, खाई जैसा गड्ढा ठीक से नहीं दिखा तो दूरबीन से देखना पड़ा। शायद विकास के साथ वोट तलासने की कोशिश भी हो सकती है लेकिन तस्वीर चर्चा में अगर बात कांग्रेस की करूं तो कांग्रेस वाले तो भारी बारिश में सड़क पर ही धरना देते दिखाई दिए। इधर दोस्तो प्रदेश के मुख्यमंत्री धामी को भी इस बात का अंदाज होता दिखाई दिया कि विपक्ष कांग्रेस वाले इस मामले को तूल दे रहे हैं और सवालों के जवाब तो आखिर सरकार को ही देने होंगे। इसको लेकर एक तरफ जहां सीएम धामी ने प्रशासनिक अपले के पेंच कसे तो वहीं मामले को गंभीर मानते हुए जांच की बात कह डाली।

इधर दोस्तो देहरादून के नंदा की चौकी स्थित नवनिर्मित पुल को लेकर लोक निर्माण विभाग ने स्थिति स्पष्ट की है। विभाग के सचिव पंकज कुमार पांडेय ने कहा है कि पुल पूरी तरह सुरक्षित है और भारी बारिश के कारण केवल एप्रोच रोड का एक हिस्सा धंसा है। उन्होंने बताया कि मौके पर युद्ध स्तर पर मरम्मत कार्य जारी है। साथ ही घटना के कारणों की जांच के आदेश दिए गए हैं और यदि किसी अधिकारी या ठेकेदार की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। दोस्तों, फिलहाल सरकार का कहना है कि पुल पूरी तरह सुरक्षित है और सिर्फ एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त हुई है, जबकि विपक्ष इस पूरे मामले को निर्माण गुणवत्ता और जवाबदेही से जोड़कर सरकार पर लगातार हमलावर है। अब सभी की नजर जांच पर टिकी है कि आखिर इतनी कम अवधि में एप्रोच रोड क्यों धंसी और क्या वास्तव में किसी स्तर पर लापरवाही हुई?अगर जांच में खामियां सामने आती हैं, तो यह सिर्फ एक सड़क का मामला नहीं रहेगा, बल्कि जनता के पैसे और सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी बड़ा सवाल होगा। अब देखना होगा कि जांच के बाद सिर्फ मरम्मत होती है या जिम्मेदारी भी तय होती है।