Politics पहाड़ी दल फिर बिखरा! | UKD | UDA | Ashutosh Negi | Surendra Kukreti | Uttarakhand News

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दोस्तो, उत्तराखंड की सियासत में एक बार फिर पहाड़ी दलों की एकजुटता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।जिस ‘उत्तराखंड डेमोक्रेटिक अलायंस’ से पहाड़ की राजनीति को नई ताकत मिलने की उम्मीद थी, आखिर उसमें ऐसा क्या हुआ कि फिर दरार पड़ गई?क्या वजह बनी आपसी खींचतान, और क्या इसी अंतर्कलह ने एक बार फिर पहाड़ी सियासत के बड़े मोर्चे को कमजोर कर दिया?आखिर पूरी कहानी क्या है—देखिए ये खास रिपोर्ट। दोस्तो 2027 के रणक्षेत्र से ठीक पहले नेता आशुतोष नेगी ने ‘उत्तराखंड डेमोक्रेटिक अलायंस’ (UDA) का गठन कर सूबे की सियासत में खलबली मचा दी है! उत्तराखंड क्रांति दल से बाहर निकाले जाने के ठीक बाद आशुतोष नेगी ने सीधे देहरादून प्रेस क्लब से हुंकार भरी है कि अब राष्ट्रीय पार्टियों और पहाड़ विरोधी ताकतों का बोरिया-बिस्तर समेटने का वक्त आ गया है! आखिर क्या है इस नए अलायंस का गेमप्लान? क्या वाकई यह गठबंधन उत्तराखंड को तीसरा विकल्प दे पाएगा या यह सिर्फ यूकेडी की आपसी अंतर्कलह का नतीजा है? दोस्तो 10 सितंबर 2026 की ये तारीख उत्तराखंड की राजनीति में एक नए अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। उत्तराखंड क्रांति दल (ऑफिशियल/आशुतोष गुट) की पहल पर प्रदेश को एक नया राजनीतिक मंच मिल गया है, जिसका नाम है—उत्तराखंड डेमोक्रेटिक अलायंस। अलायंस के रणनीतिकार आशुतोष नेगी ने साफ किया कि यह मंच उत्तराखंड के मूल हितों, जल-जंगल-जमीन, रोजगार और भू-कानून जैसे क्षेत्रीय मुद्दों को केंद्र में रखकर काम करेगा। नेगी ने आह्वान किया है कि राज्य की समस्त क्षेत्रीय ताकतें, सामाजिक संगठन और आम जनता अब एक झंडे के नीचे एकजुट हो जाए ताकि उत्तराखंड की अस्मिता को बचाया जा सके।

दोस्तो आखिर नौबत यहाँ तक कैसे आई? दरअसल, पिछले कुछ महीनों से उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) के भीतर अंदरूनी खींचतान चरम पर थी। आशुतोष नेगी, जिन्होंने पिछले दो सालों में अपनी मुखर पत्रकारिता और जमीनी संघर्ष से युवाओं के बीच यूकेडी को एक नई पहचान दी थी, उनकी सीनियर लीडरशिप से ठन गई थी। नतीजा यह हुआ कि 29 अगस्त 2026 को यूकेडी के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती ने नेगी को ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ का आरोप लगाकर 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया। लेकिन आशुतोष नेगी झुके नहीं। उन्होंने पार्टी के भीतर ही ‘UKD ऑफिशियल’ गुट खड़ा किया और अब इसे एक महा-गठबंधन यानी ‘उत्तराखंड डेमोक्रेटिक अलायंस’ में बदल दिया है। दोस्तो आशुतोष नेगी का साफ मानना है कि राज्य गठन के 26 सालों बाद भी राष्ट्रीय पार्टियों ने उत्तराखंड के युवाओं को सिर्फ पोस्टर लगाने वाला कार्यकर्ता समझा है। इस अलायंस का मुख्य उद्देश्य आज की युवा पीढ़ी (Gen-Z) को सीधे नीति निर्धारण और संगठन के शीर्ष पदों पर लाना है, ताकि वे अपने भविष्य के फैसले खुद ले सकें। दोस्तो दिलचस्प बात यह है कि इस अलायंस के गठन से ठीक पहले सोशल मीडिया पर यूकेडी के नाम से 32 संभावित उम्मीदवारों की एक लिस्ट वायरल हुई थी, जिसमें आशुतोष नेगी को रायपुर सीट से दावेदार दिखाया गया था। हालांकि, मूल यूकेडी के अध्यक्ष कुकरेती ने इस सूची को सिरे से खारिज करते हुए इसे फर्जी और पार्टी को तोड़ने की साजिश बताया। लेकिन इस वायरल लिस्ट और अब नए अलायंस के गठन ने यह साफ कर दिया है कि 2027 के चुनाव में राष्ट्रीय दलों के लिए राह आसान नहीं होने वाली है। आशुतोष नेगी के साथ जुड़ा युवाओं का एक बड़ा तबका इस नए मोर्चे को हाथों-हाथ ले रहा है। तो दोस्तों, उत्तराखंड की राजनीति अब द्विध्रुवीय (BJP vs Congress) नहीं रहने वाली। आशुतोष नेगी का यह ‘उत्तराखंड डेमोक्रेटिक अलायंस’ सीधे तौर पर उन युवाओं को टारगेट कर रहा है जो व्यवस्था से नाराज हैं। अब देखना यह होगा कि यह अलायंस धरातल पर कितना मजबूत संगठन खड़ा कर पाता है और मूल यूकेडी इस झटके से कैसे उबरती है। आपको क्या लगता है, क्या आशुतोष नेगी का यह नया अलायंस 2027 में कोई बड़ा चमत्कार कर पाएगा? अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें