Rishikesh देवभूमि में बड़े नेटवर्क की आशंका! | Bangladeshi | Forged Documents | Uttarakhand News

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देवभूमि में आखिर क्या चल रहा है, क्यों बांग्लादेशी महिलाओं की गिरफ्तारी के बाद मचा हुआ है हड़कंप? क्या ये सिर्फ कुछ अलग-अलग मामले हैं या फिर इसके पीछे छिपा है कोई बड़ा नेटवर्क?एक के बाद एक हो रही गिरफ्तारियां और हर बार फर्जी दस्तावेजों का खुलासा, क्या सिस्टम में कहीं बड़ी सेंध लग चुकी है?सबसे बड़ा सवाल—कौन हैं वो लोग। जो इस पूरे खेल को अंजाम दे रहे हैं?और क्या देवभूमि अब ऐसे अवैध नेटवर्क का नया ठिकाना बनती जा रही है? पूरी खबर बताउंगा आपको कैसे बड़े नेटवर्क की आशंका जताई जा रही है। दोस्तो बड़ी हैरानी हो रही है कि अपने उत्तराखंड में बांग्लादेशी मिलाएँ कर क्या रही है यहां क्यों रह रही हैं। ये वैध नहीं अवैध तरीके से देवभूमि रह कर करना क्या चाहती है। एक दो केस सामने आएं तो अपवाद मानकर छोड़ा जा सकता है, लेकिन ये संख्या लगातार बढती जा रही है और चिंता भी साथ के साथ बढती जा रही है। मै आपको ताजा गिरफ्तारी और पूराने कुछ केस के बारे में बताउंगा लेकिन इन सब में एक बात कॉमन है। वो भी आज चर्चा के साथ सवालों के के घेरे में है। दोस्तो ऋषिकेश में पकड़ी गई बांग्लादेशी महिला, भारत समेत दो देशों के पहचान पत्र बरामद। जी हां दोस्तो देहरादून जिले के ऋषिकेश पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए अवैध रूप से भारत में रह रही एक बांग्लादेशी महिला को गिरफ्तार किया है. महिला के पास से पश्चिम बंगाल के पते पर बना फर्जी आधार कार्ड और बांग्लादेशी पहचान पत्र बरामद हुआ है, मामले का खुलासा करते हुए पुलिस का कहना है कि, 15 अप्रैल को स्थानीय अभिसूचना इकाई (लोकल इंटेलिजेंस यूनिट) को ऋषिकेश क्षेत्र में एक बांग्लादेशी नागरिक के अवैध रूप से निवास करने की गुप्त सूचना मिली।

दोस्तो मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्काल एक संयुक्त टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने नटराज चौक क्षेत्र में सघन चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान मुखबिर की सटीक सूचना पर गेट नंबर-3 डग रोड के पास से संदिग्ध महिला को हिरासत में लिया गया। दोस्तो इतना ही नहीं अभी खुलासा होना बांकि है। दोस्तो पूछताछ के दौरान, महिला ने अपनी पहचान रीना उर्फ रीता निवासी जिला सरियातपुर, ढाका, बांग्लादेश के रूप में बताई। दोस्तो महिला ने खुलासा किया कि वह करीब एक महीने पहले रिपोन नामक व्यक्ति की मदद से अवैध रूप से भारतीय सीमा में दाखिल हुई। रिपोन ने सोशल मीडिया के माध्यम से उससे संपर्क किया और भारत में अच्छे रोजगार का झांसा दिया। भारत आने के बाद महिला ने अपनी पहचान छिपाने के लिए पश्चिम बंगाल में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एक भारतीय आधार कार्ड बनवाया। वह 13 अप्रैल को दिल्ली से बस के जरिए ऋषिकेश पहुंची। दोस्तो पुलिस ने महिला के कब्जे से बांग्लादेश का राष्ट्रीय पहचान पत्र, फर्जी भारतीय आधार कार्ड, बांग्लादेशी नागरिकता प्रमाण पत्र की छायाप्रति और एक मोबाइल बरामद किया है। कोतवाली ऋषिकेश में महिला के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस पूछताछ के साथ आगे की जांच में जुट गई है और महिला को कोर्ट में पेश करने की तैयारी कर रही है। दोस्तो गैर करने वाली बात ये है कि 2022 में भी ऋषिकेश से बांग्लादेशी महिला को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। महिला 2014 से ऋषिकेश में रह रही थी. महिला ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वोटर कार्ड, पैन कार्ड, आधार कार्ड और स्थाई निवास प्रमाण पत्र भी बनवा लिया था और फिर उन दस्तावेजों से भारत का पासपोर्ट बनवाया था।

दोस्तो इतना भर नहीं ये सिर्फ एक महिला है लेकिन उनके बारे में क्या कहेंगे जब बीते मार्च के महीने में एक साथ तीन महिलाओं को पुलिस ने गिरफ्तार किया, वहां भी एक से बढ़कर एक खुलासा किया। उत्तराखंड में ‘ऑपरेशन क्रैकडाउन’ के तहत पुलिस ने फर्जी भारतीय दस्तावेजों के आधार पर अवैध रूप से देहरादून में रह रही तीन विदेशी महिलाओं को गिरफ्तार किया है. जिनमें 1 किर्गिस्तान और 2 उज्बेकिस्तान की है। गिरफ्तार विदेशी महिलाओं में से एक महिला पहले एक साल की वीजा पर भारत आई थी, लेकिन वीजा खत्म होने के बाद अपने देश वापस न जाकर अवैध रूप से भारत में रहने लगी। इसके अलावा दो अन्य गिरफ्तार विदेशी महिलाएं अवैध तरीके से नेपाल के रास्ते भारत आई थीं। तीनों विदेशी महिलाओं ने भारत में अपने परिचित के माध्यम से फर्जी भारतीय दस्तावेज तैयार कराए थे। इतना ही नहीं गिरफ्तार विदेशी महिलाओं में से एक को पहले फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारत में रहने पर बिहार पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भी भेजा था। बाहरी और संदिग्ध व्यक्तियों की तलाश के लिए पूरे उत्तराखंड में चलाए जा रहे ऑपरेशन क्रैकडाउन के तहत सभी थाना प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्र में चेकिंग व सत्यापन अभियान चलाने को कहा गया है। जिसके तहत विभिन्न क्षेत्रों में निवास कर रहे संदिग्ध व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसी कड़ी में रायपुर पुलिस ने बाहरी व्यक्तियों के सत्यापन के दौरान तीन विदेशी महिलाओं को पकड़ा है। दरअसल, देहरादून के एक कॉम्पलैक्स के तीसरे फ्लोर में स्थित एक फ्लैट में तीन विदेशी महिलाएं संदिग्ध परिस्थिति में निवास करते हुए पाई गईं, जिनसे भारत में रहने के लिए वैध दस्तावेज मांगने पर वो कोई वैध दस्तावेज नहीं दिखा पाई। संदिग्धता के आधार पर पुलिस ने तीनों विदेशी महिलाओं को हिरासत कर पूछताछ की। दोस्तों, एक के बाद एक सामने आ रहे ये मामले अब सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि कई बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं। क्या ये सिर्फ अलग-अलग घटनाएं हैं या फिर इसके पीछे सच में कोई बड़ा और संगठित नेटवर्क काम कर रहा है?फर्जी दस्तावेज इतनी आसानी से कैसे बन रहे हैं और आखिर कौन लोग हैं जो इस पूरे खेल को चला रहे हैं?सबसे बड़ा सवाल—क्या सिस्टम में कहीं ऐसी कमजोरी है, जिसका फायदा उठाकर अवैध तरीके से लोग देवभूमि तक पहुंच रहे हैं?”और क्या आने वाले दिनों में ऐसे और खुलासे सामने आ सकते हैं?फिलहाल पुलिस जांच जारी है लेकिन सच क्या है, ये आने वाला वक्त ही बताएगा।