उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले धामी सरकार द्वारा अलग-अलग जिलों में आयोजित की जा रही कैबिनेट बैठकों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए इन बैठकों के औचित्य पर कड़ी आपत्ति जताई है। गोदियाल ने सरकार से सीधा सवाल पूछा कि यदि जिलों की बुनियादी समस्याओं का समाधान करना ही मुख्य प्राथमिकता थी, तो पूरे पांच साल के कार्यकाल के दौरान हर साल जिलावार बैठकें क्यों नहीं की गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि पांच वर्षों तक जिलों की उपेक्षा करने के बाद अब ऐन चुनाव के मुहाने पर बैठकों का यह दौर केवल मतदाताओं को लुभाने के लिए शुरू किया गया है, जो धरातल पर पूरी तरह निरर्थक साबित होगा।
हरिद्वार सहित अन्य जिलों में हुई कैबिनेट बैठकों को मात्र दिखावा बताते हुए गणेश गोदियाल ने इसे सरकार का “चुनावी लेप” करार दिया है। राज्य सरकार की नीतियों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्थिति यह है कि ‘दिक्कत बुखार की है और सरकार पेट दर्द की दवा दे रही है’। कांग्रेस नेतृत्व का दावा है कि राज्य की जनता बेरोजगारी, महंगाई और अधूरी बुनियादी सुविधाओं जैसी जमीनी समस्याओं से जूझ रही है। ऐसे में सचिवालय से बाहर निकलकर जिलों में कैबिनेट के नाम पर केवल सुर्खियां बटोरने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे जनता की वास्तविक समस्याओं का कोई हल नहीं निकलने वाला है।